CHANDIGARH, 30 DECEMBER: केंद्र सरकार और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. डॉ. मनमोहन सिंह के परिवार के बीच स्मारक के लिए किसान घाट और राष्ट्रीय स्मृति स्थल जैसी जगहों पर विचार हो रहा है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जगह आवंटन की पुष्टि की, लेकिन स्थान का खुलासा नहीं किया। जमीन आवंटन और रखरखाव पर भी चर्चा जारी है। वहीं, लोग भी जानना चाहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. डॉ. मनमोहन सिंह का स्मारक कहां बनेगा।
इस तरह लग रहा समय
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. डॉ. मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए जगह दे दी है। उनके परिवार को भी सूचित कर दिया गया है। हालांकि, जगह का खुलासा नहीं किया गया है। बताते हैं कि जल्द ही जानकारी मिल जाएगी। बताया जा रहा है कि आमतौर पर स्मारक के लिए जगह एक सोसाइटी को दी जाती है। विकास और रखरखाव की जिम्मेदारी भी उसी की होती है। इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लगेगा।
कांग्रेस कर रही ज्यादा जगह की मांग
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर दो और समाधियों के लिए जगह है। यहां चार पूर्व राष्ट्रपतियों और तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों की समाधियां हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री स्व. डॉ. मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए ज्यादा जगह की मांग की गई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
इस तरह किया था फैसला
दिल्ली में जमीन की कमी को देखते हुए वर्ष 2000 में केंद्र सरकार ने नए स्मारक न बनाने का फैसला किया था। राजघाट परिसर में पूर्व राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और उप-प्रधानमंत्रियों के 18 स्मारक हैं।
ये हैं नियम
नियमों के हिसाब से पूर्व प्रधानमंत्री स्व. डॉ. मनमोहन सिंह का स्मारक राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर बनना चाहिए। हालांकि जगह का आवंटन एक राजनीतिक फैसला होगा। एकता स्थल के पास का इलाका राष्ट्रपतियों, उपराष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के अंतिम संस्कार और स्मारकों के लिए निर्धारित किया गया था। सरकार ने 2000 में और स्मारक न बनाने का फैसला किया था, लेकिन ऐसे व्यक्तियों के लिए एक जगह तय करने में 13 साल लग गए। इससे पहले, राष्ट्रीय नेताओं के लिए अलग-अलग स्मारक बनाए जाते थे। राज घाट, शांति वन, शक्ति स्थल, वीर भूमि, एकता स्थल, समता स्थल और किसान घाट जैसे स्मारकों ने 245 एकड़ से ज्यादा जमीन घेर रखी है। स्मृति स्थल का निर्माण 2015 में पूरा हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की समाधि यहां सबसे पहले बनी।